धनबाद के प्रथम #सांसद के #पुत्र व #श्रमिक नेता #शंकर_बोस नहीं रहे झरिया: धनबाद के पहले और दूसरे सांसद रहे पीसी बोस के पुत्र व श्रमिक नेता शंकर बोस का आज निधन हो गया.

धनबाद के प्रथम #सांसद के #पुत्र व #श्रमिक नेता #शंकर_बोस नहीं रहे झरिया: धनबाद के पहले और दूसरे सांसद रहे पीसी बोस के पुत्र व श्रमिक नेता शंकर बोस का आज निधन हो गया.

#धनबाद के प्रथम #सांसद के #पुत्र व #श्रमिक नेता #शंकर_बोस नहीं रहे
झरिया: धनबाद के पहले और दूसरे सांसद रहे पीसी बोस के पुत्र व श्रमिक नेता शंकर बोस का आज निधन हो गया. 90 वर्षीय स्व. बोस ने अपने झरिया के आमलापाड़ा स्थित निवास स्थान पर अंतिम सांस ली. वे अपने पीछे एक अविवाहिता वृद्ध बहन, पुत्र एवं पौत्र छोड़ गए हैं. दिवंगत बोस के बेटे और पोते दिल्ली में रहते हैं. पिता के निधन की खबर सुन वे दिल्ली से प्रस्थान कर चुके हैं. कल अंतिम संस्कार किया जाएगा.
#इंटक से #जुड़े थे #शंकर बोस
स्व. शंकर बोस ने लंबे समय तक मजदूर आंदोलन को नेतृत्व दिया था. वे इंटक (इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस) से जुड़े रहे. उनके पिता प्रभात चंद्र बोस 1952 एवं 1957 के लोकसभा चुनाव में धनबाद से विजयी हुए थे. शंकर बोस के पिता पीसी बोस इंडियन माइनर्स एसोसिएशन, इंडियन माइन वर्कर्स फेडरेशन के अध्यक्ष, इंटक के उपाध्यक्ष, कोलमाइंस वेलफेयर एंड एडवाइजरी बोर्ड, कोल परिवहन एडवाइजरी बोर्ड, माइंस रेस्क्यू स्टेशन, झरिया माइंस बोर्ड ऑफ हेल्थ से भी जुड़े रहे. 1920 में मजदूर संगठन, ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस के उपाध्यक्ष बने। 1920 में मुंबई में हुए अधिवेशन में पीसी बोस भी बिहार से गए थे।

#MLA और #MP रहे थे #पीसी_बोस
1947 से पहले ब्रिटिश सरकार ने चुनाव कराया था। पीसी बोस इकलौता एमएलए थे। उस समय धनबाद, रांची, हजारीबाग सहित कोल बेल्ट के लिए केवल एक सीट थी। यूं कहे कि पूरे बिहार से इकलौते एमएलए थे। 1952 में लोक सेवक संघ के विभूति भूषण दास गुप्ता उनके प्रतिद्वंद्वी थे, जिन्हें भारी मतों से जनता ने पराजित किया था। फिर 1952, 1957 में लगातार धनबाद के प्रथम और द्वितीय सासंद चुने गए थे.

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